एक कविता तुम्हारे नाम
एक कविता उस सुबह के नाम
जिसमें तुमने ओस की बूंदों को मुट्ठी में भरकर मेरे तपते माथे पर रखा था,
उसकी ठंडक अभी तक मेरे जिस्म में बिखरी पड़ी है।
एक कविता उस दोपहर के नाम
जिसका सूरज मैंने तुम्हारी आंखों से देखा
और तुमने घबरा कर आंखें बंद कर ली थी की कहीं मैं झुलस न जाऊं।
एक कविता उस शाम के नाम
जब हम वक्त के कांटें थामने की कोशिश कर रहे थे,
और वक्त बच्चे की तरह खिलखिलाता हुआ
कभी लिपट जा रहा था कभी दूर भाग जा रहा था।
एक कविता उस रात के नाम
जब अनजाने में एक ख्वाब हमारे तकिए के नीचे छुप कर सो गया था,
आज भी वो नादान अंगुली पकड़ कर साथ चल रहा है।
एक कविता उन परछाइयों के नाम जिन्होंने
हमारे तुम्हारें दरमियां की रेाशनी को रेाक लिया था।
एक कविता तुम्हारे साथ के नाम,
तुम्हारे खोने और होने के नाम।
एक कविता सिर्फ तुम्हारे नाम,
रेत पर लिखी प्रेम कहानियों की तरह नहीं
गुम्बदों पर लिखी आयतों की तरह
जो वक्त की रजाई में सुकून से करवटें ले रही हैं।
एक कविता उस सुबह के नाम
जिसमें तुमने ओस की बूंदों को मुट्ठी में भरकर मेरे तपते माथे पर रखा था,
उसकी ठंडक अभी तक मेरे जिस्म में बिखरी पड़ी है।
एक कविता उस दोपहर के नाम
जिसका सूरज मैंने तुम्हारी आंखों से देखा
और तुमने घबरा कर आंखें बंद कर ली थी की कहीं मैं झुलस न जाऊं।
एक कविता उस शाम के नाम
जब हम वक्त के कांटें थामने की कोशिश कर रहे थे,
और वक्त बच्चे की तरह खिलखिलाता हुआ
कभी लिपट जा रहा था कभी दूर भाग जा रहा था।
एक कविता उस रात के नाम
जब अनजाने में एक ख्वाब हमारे तकिए के नीचे छुप कर सो गया था,
आज भी वो नादान अंगुली पकड़ कर साथ चल रहा है।
एक कविता उन परछाइयों के नाम जिन्होंने
हमारे तुम्हारें दरमियां की रेाशनी को रेाक लिया था।
एक कविता तुम्हारे साथ के नाम,
तुम्हारे खोने और होने के नाम।
एक कविता सिर्फ तुम्हारे नाम,
रेत पर लिखी प्रेम कहानियों की तरह नहीं
गुम्बदों पर लिखी आयतों की तरह
जो वक्त की रजाई में सुकून से करवटें ले रही हैं।
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